तर्पण
©️ मनोज कुमार साहु
जो वतन के वास्ते अपनी जाँ न्यौछावर कर गए,
हँसते-हँसते मातृभूमि की मिट्टी में मिल गए।
वे अमर बलिदानी इतिहास नया लिख गए,
अंधियारे पथ पर अपने प्राणों का दीप जला गए।
उन अमर शहीदों को करता हूँ कोटि नमन,
जिनके शहादत से आजाद हुआ यह पावन चमन।
मैं तो लाचार और अकिंचन सा एक इंसान हूँ,
शब्दों से उनके चरणों में 'तर्पण' अर्पित करता हूँ।
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