अजनबी चेहरा
कभी थे तुम मेरे
मगर तुम्हारा चेहरा
अब भूलने लगा हूं
कभी था मैं तुम्हारा
अब अजनबी बन गया हूं
शायद न थी मुहब्बत
बीच हमारे
अब जानने लगा हूं।
©️ मनोज कुमार साहु
जाजपुर: इतिहास एवं संस्कृति © मनोजकुमार साहू यह दास्तान कोरी कल्पना नहीं, बल्कि किस्सागोई ढंग से रचित दस्तावेज है। ज...
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