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सोमवार, 10 फ़रवरी 2025

चिट्ठी की महक

         चिट्ठी की महक

तेरी चिट्ठियों से
मेरा कमरा महक रहा है
कभी गुलाब कभी चंपा
चंदन चंदन खुशबू से
मेरा बिछौना महक रहा है।

चिट्ठियों के हर अक्षर से
मेरा दिल महक रहा है
तेरा गुस्सा तेरा प्यार
चुंबन चुंबन के एहसास को
तेरी चिट्ठियां बयान कर रही हैं।
सबसे निराली है,
चिट्ठियों की महक

  ©️ मनोज कुमार 


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