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शुक्रवार, 9 नवंबर 2018

" बेवफा शायरी " मनोजकुमार साहु

                " बेवफा " शायरी


    ‌‌‍‌‍‌‌‍‌‌               मनोजकुमार साहु 

 { सौदा }


   तुझसे तो शिकवा बहुत है
   हाँ तू भी गुनहगार है
   मोहब्बत में सौदा नहीं होता
   ये तुझे पता नहीं है ?
             •••

  { बेवफा }


   अरे दुनिया सच्चे आशिक को हरा नहीं पाई है
   न प्यार के दुश्मन उसे रुला पाए हैं
   जिसकी महबूबा बेवफा हो
   उसे भी रोना नहीं चाहिए ।।
               •••

  { शायर }


   मनोज ! क्यों आए हमें शर्म
   प्यार तो गुनाह भी नहीं है
   हर चोट खाया हुआ आशिक
   शायर जरूर बन जाता है ।।
                •••

   { यकीन }


   हम तो हँसते हैं खुद पर
   और तेरी नादानी पर
   कसूर तो हमने की है
   यकीन करके तुझ पर ।।
             •••

  { बेवफ़ाई }


   कहते हैं उम्र बढ़ते ही
   आईना भी बेवफा हो जाता है
   और बेवफाई जिस इंसान की फितरत हो
   वह कभी भी हाथ छोड़ सकता है ।।
                    •••

 { इश्क़ मिज़ाजी - इश्क़ हकीकी }


  हर बार गोताखोर
  मोतियाँ नहीं ला पाता है
  इश्क मिजाजी बहुत देखे हैं हमने
  इश्क हकीकी देखने को नहीं मिलता है ।।
                     •••

  { लूट  }


  चाहते तो हम भी तुझे कब से लूट लेते
  लेकिन तुझ जैसी नहीं हमारी फितरत
  लूट कर तू फिर भी कंगाल
  और लुटा कर हम अब भी  बादशाह हैं ।।

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